★आद्य ऐतिहासिक काल - इस काल का समय 2300 सेेे 1750 ई.पू. है। इस काल के अंतर्गत सिंधु सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और कांस्य युगीन सभ्यता को रखा गया हैं।इस काल में लेखन कला का विकास हो चुका था। लेकिन इस काल से प्राप्त लिपि को अभी तक पढ़ा नहींं जा सका है। इस काल के साक्ष्य छत्तीसगढ़़ में नहीं मिलते हैं।
★ऐतिहासिक काल -इस काल का समय 1500 से 600 ई.पू. तक है। इसकेे अंतर्गत वैदिक सभ्यता का काल आता है। इस काल को दो भागो मे विभाजित कियाा गया , जो निम्न है:-
1ऋग्वैदिक काल (1500 से 1000 ई.पू.)-इस काल में ऋग्वेद का निर्माण हुआ। इस काल में सभ्यता केे निर्माता आर्य पंचनद (उत्तर भारत) तक विस्तृृत थे। अतः इस काल में भी छत्तीसगढ़ का वर्णन नहीं मिलताा है।
2 उत्तर वैदिक काल(1000 से 600 ई.पू.)- उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार मध्य भारत में होना प्रारंभ हो चुका था तथा इस काल में नर्मदा नदी को रेवा नदी के नाम से भारत में उल्लेखित किया गया है। उत्तर वैदिक काल में भारत के दक्षिण भाग से संबंधित विवरण मिलने लगतेे हैं। शतपथ ब्राम्हण मैं पूर्व एवं पश्चिम मेंं स्थित समुद्रों का वर्णन मिलताा है। कौशीतिक उपनिषद् मैं विंध्य पर्वत का उल्लेख मिलताा है। अतः उत्तर वैदिक काल में छत्तीसगढ़ का वर्णन मिलता है।