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छत्तीसगढ़ का इतिहास (रामायण काल)

                 ★रामायण काल★
रामायण काल में छत्तीसगढ़ का साक्ष्य मिलता हैं। 'कोसल खंड' नामक एक अप्रकाशित ग्रंथ से पता चलता है की विंध्य पर्वत में नागपत्तन के पास कोसल नामक एक शक्तिशाली राजा का शासन था । इसके नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम कोसल पड़ा ।कोसल  राज्य दो भागों में विभाजित था, उत्तर कोसल और दक्षिण कोसल। दक्षिण कोसल में राजा भानुमंत का शासन चलता था। जिसकी पुत्री कौशल्या थी। कौशल्या का विवाह  उत्तर कोसल के राजा दशरथ से हुआ था, किंतु राजा भानुमंत का कोई पुत्र नहीं होने के कारण दक्षिण कोसल का शासन राजा दशरथ को मिल गया। इस समय में छत्तीसगढ़ की भाषा कोसली थी। अतः कोसली छत्तीसगढ़ की प्राचीनतम भाषा है। श्रीराम के पश्चात उत्तर कौशल के राजा उनके बड़े पुत्र लव हुए जिसकी की राजधानी श्रावस्ती थी, और दक्षिण कौशल पर उनके छोटे पुत्र कुुश ने शासन स्थापित किया जिसकी राजधानी कुशस्थली थी।

रामायण काल में छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्थान
जिला                                  स्थान
सरगुजा :-        रामगढ़, सीताबेंगरा, लक्ष्मणबेंगरा
रायगढ़ :-        राम झरना। 
जांजगीर चांपा :- शिवरीनारायण (श्री राम ने                               शबरी  के जूठे बेर खाए)
                       खरौद (खरदूषण का वध)
कांकेर :-          पंचवटी (सीताहरण का उल्लेख)
महासमुंद :-      तूतूरिया (वाल्मीकि आश्रम, लव                        कुश का जन्मस्थल)